आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएं
आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएं
Unit overview: the topics below, with their summaries, are the syllabus for this unit. The comprehensive note further down covers every topic in full — explanations, definitions, worked examples, tables, exam points and practice questions. Standalone one-topic learning pages are not built yet — every topic on this page is covered in the notes and the practice questions below, and each topic card links to those sections.
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आत्मकथा
High weightageतुलसीराम — मुर्दहिया; मन्नू भंडारी — एक कहानी यह भी; हरिवंशराय बच्चन — क्या भूलूँ क्या याद करूँ; रमणिका गुप्ता — आपहुदरी।
संस्मरण और रेखाचित्र
Mediumरामवृक्ष बेनीपुरी — माटी की मूरतें; महादेवी वर्मा — ठकुरी बाबा; शिवरानी देवी — प्रेमचन्द घर में।
यात्रा साहित्य और डायरी
Mediumराहुल सांकृत्यायन — मेरी तिब्बत यात्रा; अज्ञेय — अरे यायावर रहेगा याद; मुक्तिबोध — एक लेखक की डायरी।
अन्य गद्य
Mediumहरिशंकर परसाई — भोलाराम का जीव; कृष्ण चन्दर — जामुन का पेड़; दिनकर — संस्कृति के चार अध्याय।
Comprehensive unit note · ~13 min read
आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ हिन्दी गद्य की वे विधाएँ हैं जिनमें जीवन, स्मृति, यात्रा और अनुभव का चित्रण होता है। इन विधाओं की विशेषता यह है कि इनमें तथ्य और कल्पना, व्यक्तिगत और सामाजिक, तथा विवरण और चिंतन का संतुलन होता है। आत्मकथा में लेखक अपने जीवन को स्वयं प्रस्तुत करता है, जीवनी में किसी अन्य व्यक्ति के जीवन को प्रस्तुत किया जाता है, संस्मरण में स्मृतियों का चित्रण होता है, रेखाचित्र में किसी व्यक्ति या दृश्य का जीवंत चित्र होता है, यात्रा साहित्य में यात्रा के अनुभव होते हैं, डायरी में दैनिक अनुभवों का तात्कालिक लेखन होता है, और अन्य गद्य विधाओं में पत्र, रिपोर्ताज, व्यंग्य और साक्षात्कार जैसे रूप आते हैं। इन विधाओं का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे साहित्य को जीवन के निकट लाती हैं, और उनमें युग का इतिहास भी दर्ज होता है। इस इकाई में हम आत्मकथा, जीवनी, संस्मरण और रेखाचित्र, यात्रा साहित्य और डायरी, तथा अन्य गद्य विधाओं का अलग-अलग अध्ययन करेंगे। प्रत्येक विधा की परिभाषा, विशेषताओं, प्रमुख रचनाओं और रचनाकारों को पढ़ेंगे। इन विधाओं को पढ़ते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि इनमें तथ्य की प्रामाणिकता और साहित्यिकता का संतुलन आवश्यक है, क्योंकि केवल तथ्य नीरस हो जाता है और केवल कल्पना अविश्वसनीय हो जाती है।
Learning objectives
- आत्मकथा की परिभाषा, विशेषताओं और प्रमुख रचनाओं को समझना।
- जीवनी की परिभाषा, प्रकारों और प्रमुख रचनाओं को जानना।
- संस्मरण और रेखाचित्र के भेद तथा विशेषताओं का परिचय प्राप्त करना।
- यात्रा साहित्य और डायरी की विशेषताओं का मूल्यांकन करना।
- अन्य गद्य विधाओं — पत्र, रिपोर्ताज, व्यंग्य, साक्षात्कार — को समझना।
- विधा, रचना और रचनाकार के बीच संबंध स्थापित करना।
Overview
आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाओं का सामान्य आधार जीवन लेखन है। जीवन लेखन में लेखक किसी व्यक्ति के जीवन, अनुभव और युग का चित्रण करता है। आत्मकथा में लेखक स्वयं अपना जीवन लिखता है, इसलिए उसमें आत्मस्वीकृति, आत्मालोचन और आत्मविश्लेषण की संभावना अधिक होती है। जीवनी में लेखक किसी अन्य व्यक्ति का जीवन लिखता है, इसलिए उसमें तथ्य, प्रमाण और मूल्यांकन का संतुलन आवश्यक होता है। संस्मरण में लेखक अपने संपर्क में आए व्यक्तियों और घटनाओं का स्मरण करता है, इसलिए उसमें व्यक्तिगत अनुभव और युग का इतिहास दोनों मिलते हैं। रेखाचित्र में किसी व्यक्ति या दृश्य का संक्षिप्त परंतु जीवंत चित्र होता है, जिसमें विवरण की सूक्ष्मता और भाषा की चित्रात्मकता प्रमुख होती है। यात्रा साहित्य में लेखक अपनी यात्रा के अनुभव, स्थानों का वर्णन, संस्कृति का अवलोकन और आत्मचिंतन प्रस्तुत करता है। डायरी में दैनिक अनुभवों, विचारों और भावनाओं का तात्कालिक लेखन होता है, जिसमें ईमानदारी और तात्कालिकता प्रमुख होती है। अन्य गद्य विधाओं में पत्र साहित्य, रिपोर्ताज, व्यंग्य और साक्षात्कार आते हैं, जिनमें प्रत्येक का अपना रूप और प्रयोजन है। इन सभी विधाओं में एक समानता है, वे सभी जीवन से जुड़ी हुई हैं, और उनमें साहित्यिकता तथा तथ्य का मेल होता है। इस अवलोकन के बाद अब हम प्रत्येक विषय को विस्तार से पढ़ेंगे।
आत्मकथा
आत्मकथा वह गद्य विधा है जिसमें लेखक अपने जीवन का विवरण स्वयं देता है। आत्मकथा की पहली विशेषता आत्मस्वीकृति है, अर्थात लेखक अपने जीवन की सफलताओं के साथ अपनी भूलों, कमजोरियों और संघर्षों को भी स्वीकार करता है। दूसरी विशेषता आत्मालोचन है, जिसमें लेखक अपने जीवन का मूल्यांकन करता है। तीसरी विशेषता युग का चित्रण है, क्योंकि लेखक का जीवन उसके युग से अलग नहीं होता, इसलिए आत्मकथा में युग की राजनीति, समाज, संस्कृति और साहित्य की झलक भी मिलती है। हिन्दी की प्रमुख आत्मकथाओं में हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा, जिसमें क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक आते हैं, महत्वपूर्ण हैं। बच्चन की आत्मकथा में व्यक्तिगत जीवन, साहित्यिक जीवन और युग की चेतना का मेल है। उनकी भाषा सहज, आत्मीय और काव्यात्मक है। अन्य प्रमुख आत्मकथाओं में राजेंद्र प्रसाद, महादेवी वर्मा और अन्य लेखकों की आत्मकथाएँ आती हैं। दलित आत्मकथाओं में जाति के अनुभव, अपमान, संघर्ष और आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति केंद्रीय है। दलित आत्मकथा की विशेषता यह है कि वह केवल व्यक्तिगत जीवन की कथा नहीं है, वह एक समुदाय के अनुभव की कथा भी है। आत्मकथा की सीमा यह है कि लेखक अपने जीवन को पूरी तरह निष्पक्ष रूप से नहीं लिख सकता, क्योंकि स्मृति, आत्मरक्षा और आत्मप्रशंसा का प्रभाव पड़ सकता है। परंतु आत्मकथा की उपलब्धि यह है कि वह पाठक को लेखक के आंतरिक जीवन, उसके संघर्ष और उसके युग की झलक देती है। आत्मकथा को पढ़ते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि आत्मकथा केवल तथ्यों की सूची नहीं है, वह एक दृष्टि भी है, जिसमें लेखक अपने जीवन को अपने ढंग से देखता है।
जीवनी
जीवनी वह गद्य विधा है जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के जीवन का चित्रण किया जाता है। जीवनी की पहली विशेषता तथ्य की प्रामाणिकता है, अर्थात जीवनीकार को व्यक्ति के जीवन के तथ्यों, घटनाओं, पत्रों और दस्तावेजों के आधार पर लिखना चाहिए। दूसरी विशेषता मूल्यांकन है, जिसमें जीवनीकार व्यक्ति के जीवन, उसके योगदान और उसकी सीमाओं का मूल्यांकन करता है। तीसरी विशेषता संतुलन है, जिसमें प्रशंसा और आलोचना का संतुलन होना चाहिए। यदि जीवनी केवल प्रशंसा करती है, तो वह स्तुति बन जाती है, और यदि केवल आलोचना करती है, तो वह निंदा बन जाती है। जीवनी के प्रकारों में प्रामाणिक जीवनी, आत्मकथ्यात्मक जीवनी, संस्मरणात्मक जीवनी और उपन्यासात्मक जीवनी आते हैं। प्रामाणिक जीवनी में तथ्य और प्रमाण प्रमुख होते हैं। उपन्यासात्मक जीवनी में कथा तत्व अधिक होता है। हिन्दी की प्रमुख जीवनियों में प्रेमचंद, गांधी, नेहरू, भगत सिंह और अन्य महापुरुषों की जीवनियाँ आती हैं। अमृतराय की प्रेमचंद की जीवनी कलम का सिपाही हिन्दी की श्रेष्ठ जीवनियों में गिनी जाती है, जिसमें प्रेमचंद के जीवन, उनके साहित्य और उनके युग का चित्रण है। जीवनी की भाषा में स्पष्टता, सहजता और तथ्य की प्रामाणिकता होनी चाहिए। जीवनी का महत्व यह है कि वह पाठक को किसी महान व्यक्ति के जीवन, उसके संघर्ष, उसके विचारों और उसके योगदान से परिचित कराती है, और उसे प्रेरणा देती है। जीवनी को पढ़ते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि जीवनी केवल व्यक्ति की कथा नहीं है, वह उसके युग की कथा भी है, क्योंकि व्यक्ति अपने युग से अलग नहीं होता।
संस्मरण और रेखाचित्र
संस्मरण और रेखाचित्र दोनों ही स्मृति और चित्रण पर आधारित विधाएँ हैं, परंतु उनमें भेद है। संस्मरण में लेखक अपने संपर्क में आए व्यक्तियों और घटनाओं का स्मरण करता है। संस्मरण की विशेषता यह है कि उसमें व्यक्तिगत अनुभव और युग का इतिहास दोनों मिलते हैं। संस्मरण में लेखक केवल व्यक्ति का वर्णन नहीं करता, बल्कि उस व्यक्ति के साथ अपने संबंध, उस समय की परिस्थिति और उस अनुभव का अपने जीवन पर प्रभाव भी बताता है। हिन्दी के प्रमुख संस्मरणों में महादेवी वर्मा के संस्मरण, रामवृक्ष बेनीपुरी के संस्मरण और अन्य लेखकों के संस्मरण आते हैं। महादेवी वर्मा के संस्मरणों में स्मृति, करुणा और मानवीय संवेदना का मेल है। उनकी भाषा काव्यात्मक और आत्मीय है। रेखाचित्र में किसी व्यक्ति या दृश्य का संक्षिप्त परंतु जीवंत चित्र प्रस्तुत किया जाता है। रेखाचित्र की विशेषता यह है कि वह संक्षिप्त होता है, परंतु उसमें व्यक्ति का पूरा चरित्र, उसकी आदतें, उसकी भाषा और उसकी विशेषताएँ झलक जाती हैं। रेखाचित्र में विवरण की सूक्ष्मता और भाषा की चित्रात्मकता प्रमुख होती है। महादेवी वर्मा के रेखाचित्रों में अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ और अन्य संग्रहों में ग्रामीण जीवन के पात्रों का जीवंत चित्रण है। रामवृक्ष बेनीपुरी के रेखाचित्रों में भी ग्रामीण जीवन और सामान्य जन का चित्रण है। संस्मरण और रेखाचित्र में भेद यह है कि संस्मरण में स्मृति और अनुभव का विस्तार होता है, जबकि रेखाचित्र में चित्र की संक्षिप्तता और तीव्रता होती है। संस्मरण में लेखक स्वयं भी पात्र होता है, रेखाचित्र में चित्रित व्यक्ति केंद्रीय होता है। दोनों विधाओं की उपलब्धि यह है कि उन्होंने हिन्दी गद्य को जीवन के निकट लाया और सामान्य जन के पात्रों को साहित्य में स्थान दिया।
यात्रा साहित्य और डायरी
यात्रा साहित्य वह विधा है जिसमें लेखक अपनी यात्रा के अनुभव, स्थानों का वर्णन, संस्कृति का अवलोकन और आत्मचिंतन प्रस्तुत करता है। यात्रा साहित्य की पहली विशेषता स्थान का वर्णन है, जिसमें लेखक किसी स्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विशेषताओं का वर्णन करता है। दूसरी विशेषता अनुभव है, जिसमें यात्रा के दौरान लेखक को जो अनुभव होते हैं, जैसे लोगों से मिलना, कठिनाइयों का सामना करना, नई संस्कृति को समझना, उनका वर्णन होता है। तीसरी विशेषता आत्मचिंतन है, जिसमें यात्रा लेखक को अपने जीवन, अपने समाज और अपनी संस्कृति पर नए सिरे से सोचने का अवसर देती है। हिन्दी के प्रमुख यात्रा साहित्य में राहुल सांकृत्यायन, अज्ञेय, निर्मल वर्मा और अन्य लेखकों की यात्रा रचनाएँ आती हैं। राहुल सांकृत्यायन के यात्रा वृत्तांतों में घुमक्कड़ी, ज्ञान की खोज और विभिन्न संस्कृतियों का अवलोकन प्रमुख है। अज्ञेय के यात्रा लेखन में प्रकृति, संस्कृति और आत्मचिंतन का मेल है। डायरी वह विधा है जिसमें दैनिक अनुभवों, विचारों और भावनाओं का तात्कालिक लेखन होता है। डायरी की विशेषता यह है कि वह तात्कालिक होती है, अर्थात लेखक उसी दिन या उसी समय अपने अनुभव लिखता है, इसलिए उसमें ईमानदारी और तात्कालिकता होती है। डायरी में लेखक अपने जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं, अपने विचारों, अपनी चिंताओं और अपनी आशाओं को लिखता है। डायरी की भाषा सहज और आत्मीय होती है, क्योंकि वह प्रकाशन के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के लिए लिखी जाती है, यद्यपि बाद में वह प्रकाशित भी हो सकती है। यात्रा साहित्य और डायरी दोनों में व्यक्तिगत अनुभव केंद्रीय है, परंतु यात्रा साहित्य में स्थान और संस्कृति का वर्णन अधिक होता है, जबकि डायरी में दैनिक जीवन और आंतरिक चिंतन अधिक होता है। दोनों विधाओं की उपलब्धि यह है कि उन्होंने हिन्दी गद्य को व्यक्तिगत अनुभव और आत्मचिंतन की दिशा दी।
अन्य गद्य
अन्य गद्य विधाओं में पत्र साहित्य, रिपोर्ताज, व्यंग्य, साक्षात्कार और डायरी से जुड़े अन्य रूप आते हैं। पत्र साहित्य में पत्रों के माध्यम से व्यक्तित्व, संबंध और युग की झलक मिलती है। पत्रों में लेखक की भाषा सहज होती है, और उनमें व्यक्तिगत भावनाओं के साथ युग की परिस्थितियों का भी वर्णन होता है। हिन्दी में प्रेमचंद, निराला, अज्ञेय और अन्य लेखकों के पत्र साहित्यिक महत्व के हैं। रिपोर्ताज में किसी घटना या स्थान का प्रत्यक्षदर्शी विवरण होता है, जिसमें पत्रकारिता और साहित्य का मेल होता है। रिपोर्ताज की विशेषता यह है कि लेखक स्वयं घटना का साक्षी होता है, और वह घटना का जीवंत, तात्कालिक और साहित्यिक वर्णन करता है। रिपोर्ताज में तथ्य की प्रामाणिकता और भाषा की साहित्यिकता दोनों आवश्यक हैं। व्यंग्य में हास्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों की आलोचना की जाती है। व्यंग्य की विशेषता यह है कि वह हास्यपूर्ण होता है, परंतु उसका लक्ष्य गंभीर होता है। हरिशंकर परसाई, शरद जोशी और अन्य व्यंग्यकारों ने हिन्दी व्यंग्य को समृद्ध किया है। साक्षात्कार में किसी व्यक्ति से प्रश्नोत्तर के माध्यम से उसके विचारों, जीवन और दृष्टि को प्रस्तुत किया जाता है। साक्षात्कार की विशेषता यह है कि उसमें प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता के बीच संवाद होता है, और उस संवाद से व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रकट होता है। अन्य गद्य विधाओं में आत्मकथ्य, संस्मरण और रेखाचित्र से जुड़े रूप भी आते हैं, जिनमें लेखक अपने जीवन के किसी पक्ष को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करता है। अन्य गद्य विधाओं का महत्व यह है कि वे हिन्दी गद्य को विविधता देती हैं, और वे साहित्य को जीवन के विभिन्न रूपों से जोड़ती हैं। परीक्षा में इन विधाओं की परिभाषा, भेद और प्रमुख रचनाओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए प्रत्येक विधा की एक-दो प्रमुख रचनाओं को याद रखना आवश्यक है।
Key definitions
- आत्मकथा: वह गद्य विधा जिसमें लेखक अपने जीवन का विवरण स्वयं देता है, जिसमें आत्मस्वीकृति और आत्मालोचन होता है।
- जीवनी: वह गद्य विधा जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के जीवन का चित्रण तथ्य और मूल्यांकन के संतुलन के साथ किया जाता है।
- संस्मरण: वह गद्य विधा जिसमें लेखक अपने संपर्क में आए व्यक्तियों और घटनाओं का स्मरण करता है।
- रेखाचित्र: वह गद्य विधा जिसमें किसी व्यक्ति या दृश्य का संक्षिप्त परंतु जीवंत चित्र प्रस्तुत किया जाता है।
- यात्रा साहित्य: वह गद्य विधा जिसमें यात्रा के अनुभव, स्थानों का वर्णन, संस्कृति का अवलोकन और आत्मचिंतन होता है।
- डायरी: वह गद्य विधा जिसमें दैनिक अनुभवों, विचारों और भावनाओं का तात्कालिक लेखन होता है।
- रिपोर्ताज: वह गद्य विधा जिसमें किसी घटना या स्थान का प्रत्यक्षदर्शी विवरण पत्रकारिता और साहित्य के मेल से किया जाता है।
- पत्र साहित्य: वह गद्य विधा जिसमें पत्रों के माध्यम से व्यक्तित्व, संबंध और युग की झलक मिलती है।
Worked examples
Example 1: आत्मकथा और जीवनी में क्या अंतर है?
आत्मकथा में लेखक अपना जीवन स्वयं लिखता है, इसलिए उसमें आत्मस्वीकृति और आत्मालोचन अधिक होता है। जीवनी में लेखक किसी अन्य व्यक्ति का जीवन लिखता है, इसलिए उसमें तथ्य, प्रमाण और मूल्यांकन का संतुलन आवश्यक होता है। आत्मकथा में लेखक स्वयं पात्र होता है, जीवनी में अन्य व्यक्ति पात्र होता है।
Example 2: संस्मरण और रेखाचित्र में क्या भेद है?
संस्मरण में लेखक अपने संपर्क में आए व्यक्तियों और घटनाओं का स्मरण करता है, जिसमें व्यक्तिगत अनुभव और युग का इतिहास दोनों मिलते हैं। रेखाचित्र में किसी व्यक्ति या दृश्य का संक्षिप्त परंतु जीवंत चित्र होता है, जिसमें विवरण की सूक्ष्मता और चित्रात्मकता प्रमुख होती है। संस्मरण में विस्तार होता है, रेखाचित्र में संक्षिप्तता और तीव्रता होती है।
Example 3: यात्रा साहित्य और डायरी में क्या अंतर है?
यात्रा साहित्य में यात्रा के अनुभव, स्थानों का वर्णन और संस्कृति का अवलोकन प्रमुख होता है, जबकि डायरी में दैनिक अनुभवों, विचारों और भावनाओं का तात्कालिक लेखन होता है। यात्रा साहित्य में स्थान केंद्रीय है, डायरी में दैनिक जीवन और आंतरिक चिंतन केंद्रीय है।
जीवन लेखन की विधाएँ
| विधा | लेखक और विषय | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| आत्मकथा | लेखक स्वयं | आत्मस्वीकृति, आत्मालोचन |
| जीवनी | अन्य व्यक्ति | तथ्य, प्रमाण, मूल्यांकन |
| संस्मरण | संपर्क में आए व्यक्ति | स्मृति, अनुभव, युग का इतिहास |
| रेखाचित्र | व्यक्ति या दृश्य | संक्षिप्त, जीवंत चित्र |
अन्य गद्य विधाएँ
| विधा | मुख्य तत्व | विशेषता |
|---|---|---|
| यात्रा साहित्य | स्थान, अनुभव, संस्कृति | वर्णन और आत्मचिंतन |
| डायरी | दैनिक अनुभव | तात्कालिकता, ईमानदारी |
| पत्र साहित्य | पत्र, संबंध | सहज भाषा, व्यक्तित्व |
| रिपोर्ताज | प्रत्यक्षदर्शी विवरण | पत्रकारिता और साहित्य का मेल |
Diagrams (described)
जीवन लेखन का आरेख: आत्मकथा, जीवनी, संस्मरण और रेखाचित्र चार भाग, प्रत्येक के साथ लेखक और विषय का संबंध लिखा हो।
यात्रा और डायरी का आरेख: यात्रा साहित्य में स्थान से अनुभव और अनुभव से आत्मचिंतन तक की श्रृंखला, डायरी में दिन से अनुभव और अनुभव से चिंतन तक की श्रृंखला।
Exam points
- आत्मकथा में लेखक अपना जीवन स्वयं लिखता है, जीवनी में अन्य व्यक्ति का जीवन लिखा जाता है।
- बच्चन की आत्मकथा में क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर और दशद्वार से सोपान तक आते हैं।
- कलम का सिपाही प्रेमचंद की जीवनी है, और अमृतराय उसके रचनाकार हैं।
- महादेवी वर्मा संस्मरण और रेखाचित्र दोनों की प्रमुख रचनाकार हैं।
- संस्मरण में स्मृति और अनुभव का विस्तार होता है, रेखाचित्र में संक्षिप्त और जीवंत चित्र होता है।
- राहुल सांकृत्यायन यात्रा साहित्य के प्रमुख लेखक हैं, जिनमें घुमक्कड़ी और ज्ञान की खोज प्रमुख है।
- डायरी में तात्कालिकता और ईमानदारी प्रमुख होती है।
- रिपोर्ताज में प्रत्यक्षदर्शी विवरण होता है, जिसमें पत्रकारिता और साहित्य का मेल होता है।
Common mistakes
- आत्मकथा और जीवनी को एक ही समझना भूल है, आत्मकथा स्वयं की है, जीवनी अन्य की है।
- संस्मरण और रेखाचित्र को एक ही समझना भूल है, संस्मरण में विस्तार है, रेखाचित्र में संक्षिप्तता है।
- यात्रा साहित्य को केवल स्थान का वर्णन समझना भूल है, उसमें अनुभव और आत्मचिंतन भी है।
- डायरी को केवल दैनिक घटनाओं की सूची समझना भूल है, उसमें विचार और भाव भी होते हैं।
- जीवनी को केवल प्रशंसा समझना भूल है, उसमें मूल्यांकन और संतुलन भी आवश्यक है।
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Quick revision: इस इकाई का सार यह है कि आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ जीवन लेखन की विधाएँ हैं, जिनमें तथ्य और साहित्यिकता का संतुलन होता है। आत्मकथा स्वयं की है, जीवनी अन्य की है, संस्मरण में स्मृति का विस्तार है, रेखाचित्र में संक्षिप्त चित्र है, यात्रा साहित्य में स्थान और अनुभव है, डायरी में तात्कालिकता है, और अन्य गद्य में पत्र, रिपोर्ताज, व्यंग्य तथा साक्षात्कार आते हैं। दोहराते समय प्रत्येक विधा की परिभाषा, एक प्रमुख रचना और एक प्रमुख रचनाकार को एक साथ याद करें। किसी भी विधा का नाम आते ही पहले उसकी परिभाषा, फिर उसका भेद, और फिर उसकी प्रमुख रचना याद करें।
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