प्रसाद के तीन नाटक पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं — 'चन्द्रगुप्त', 'स्कंदगुप्त' और 'ध्रुवस्वामिनी'। प्रसाद के नाटक ऐतिहासिक हैं, पर इतिहास उनका साधन है, उद्देश्य है — राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव का जागरण। 'चन्द्रगुप्त' में चाणक्य की कूटनीति और अलका का देश-प्रेम है; 'स्कंदगुप्त' में हूण-आक्रमण के विरुद्ध संघर्ष है; 'ध्रुवस्वामिनी' में नारी-मुक्ति का प्रश्न है — ध्रुवस्वामिनी अपने कायर पति को त्यागकर चंद्रगुप्त से विवाह करती है, जो उस युग में क्रांतिकारी था।
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प्रसाद
Hindi (Code 20) · Unit 8 · ~11 min read · Original chapter
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