गोदान (1936) प्रेमचंद का अंतिम और सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है — होरी की कथा, जो किसान-जीवन का महाकाव्य है। होरी की एकमात्र इच्छा है — गाय (गोदान) पालना; पर ऋण, महाजनी शोषण और सामाजिक रूढ़ियाँ उसे जीवन भर कुचलती हैं, और अंत में वह मजदूर बनकर मरता है। धनिया, गोबर, झुनिया, राय साहब, मेहता, मालती — पात्रों का जाल गाँव और शहर, किसान और ज़मींदार, शोषक और शोषित का पूरा समाज-चित्र बनाता है।
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प्रेमचन्द — गोदान
Hindi (Code 20) · Unit 6 · ~11 min read · Original chapter
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