रीतिकालीन कविता के निर्धारित अंश दो हैं — बिहारी सतसई के दोहे 4–50 (सं. जगन्नाथ दास रत्नाकर) और घनानंद के कवित्त 4–30 (सं. विश्वनाथ मिश्र)। बिहारी के दोहे 'गागर में सागर' हैं — दो पंक्तियों में पूरा चित्र, पूरा भाव। घनानंद के कवित्त सुजान के प्रति प्रेम-वेदना के गीत हैं — 'अति सूधो सनेह को मारग है' उनकी प्रसिद्ध उक्ति है। दोनों मिलकर रीतिकाल के दो ध्रुव दिखाते हैं: कला-चमत्कार और हृदय-वेदना।
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रीतिकालीन कविता
Hindi (Code 20) · Unit 5 · ~10 min read · Original chapter
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