भक्तिकालीन कविता के निर्धारित अंश पाँच हैं — कबीर के पद 60–209 (सं. हजारी प्रसाद द्विवेदी), जायसी की नागमती वियोग खंड, सूर के भ्रमरगीत सार के पद 24–70 (सं. रामचंद्र शुक्ल), तुलसी का रामचरितमानस उत्तर काण्ड और मीरा के प्रारंभिक 20 पद (सं. विश्वनाथ त्रिपाठी)। कबीर का निर्गुण, जायसी का प्रेम-विरह, सूर का वात्सल्य-शृंगार, तुलसी की मर्यादा और मीरा का माधुर्य — पाँचों मिलकर भक्तिकाल का पूरा मानचित्र बनाते हैं।
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भक्तिकालीन कविता
Hindi (Code 20) · Unit 5 · ~11 min read · Original chapter
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