गांधी दर्शन के दो आधार-स्तंभ हैं — सत्य और अहिंसा। सत्य केवल वचन की सत्यता नहीं, जीवन का सिद्धान्त है; अहिंसा केवल हिंसा न करना नहीं, प्रेम और करुणा का सक्रिय भाव है। इनसे जुड़े हैं — सत्याग्रह (सत्य के लिए आग्रह), स्वदेशी, ट्रस्टीशिप (धन का न्यास), सर्वोदय (सबका उदय) और रामराज्य (न्यायपूर्ण समाज)। हिन्दी साहित्य में गांधी-चेतना प्रेमचंद के उत्तरकालीन उपन्यासों, मैथिलीशरण गुप्त और दिनकर की कविताओं में दिखती है।
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गांधीवादी दर्शन
Hindi (Code 20) · Unit 4 · ~11 min read · Original chapter
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