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अम्बेडकर दर्शन

Hindi (Code 20) · Unit 4 · ~11 min read · Original chapter

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अम्बेडकर दर्शन का केंद्र है — जाति का उन्मूलन और सामाजिक न्याय। 'जाति का विनाश' (Annihilation of Caste, 1936) में उन्होंने कहा कि जाति केवल श्रम-विभाजन नहीं, श्रमिकों का विभाजन है, और उसका आधार धार्मिक मान्यता है; इसलिए जाति का अंत धर्म-सुधार से नहीं, जाति-व्यवस्था के ही विनाश से होगा। उनके तीन सूत्र — शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो — दलित चेतना के आधार बने। हिन्दी दलित साहित्य (ओमप्रकाश वाल्मीकि, मोहनदास नैमिशराय) इसी दर्शन की साहित्यिक परिणति है।

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