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प्रमुख संप्रदाय और सिद्धान्त

Hindi (Code 20) · Unit 3 · ~11 min read · Original chapter

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भारतीय काव्यशास्त्र में काव्य की आत्मा को लेकर छह संप्रदाय बने — रस (भरत), अलंकार (भामह), रीति (वामन), ध्वनि (आनंदवर्धन), वक्रोक्ति (कुंतक) और औचित्य (क्षेमेंद्र)। परीक्षा का सबसे सामान्य प्रश्न यही है: किस आचार्य ने किसे काव्य की आत्मा कहा? उत्तर: भरत — रस; वामन — रीति ('रीतिरात्मा काव्यस्य'); आनंदवर्धन — ध्वनि ('काव्यस्यात्मा ध्वनिः'); कुंतक — वक्रोक्ति ('वक्रोक्तिः काव्यजीवितम्')।

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