रूसी रूपवाद (1915–1930) ने साहित्य-अध्ययन का केंद्र लेखक और समाज से हटाकर 'साहित्यिकता' (literariness) पर रखा — वह क्या है जो भाषा को साहित्य बनाता है? उत्तर: विचलन (deviation) और अपरिचितीकरण (defamiliarisation) — श्क्लोव्स्की का प्रसिद्ध सूत्र: कला वस्तुओं को अपरिचित बनाकर देखने की कला है। नयी समीक्षा (अमेरिका, 1930–50) ने कृति को स्वायत्त वस्तु माना — पाठ-केंद्रित विश्लेषण, 'इरादतन भ्रांति' (intentional fallacy) और 'भावात्मक भ्रांति' (affective fallacy) से बचना।
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रूसी रूपवाद और नयी समीक्षा
Hindi (Code 20) · Unit 3 · ~11 min read · Original chapter
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