रस-सूत्र है — 'विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः'। अर्थात स्थायी भाव जब विभाव (कारण), अनुभाव (कार्य) और व्यभिचारी भावों (संचारी) से संयुक्त होता है, तो रस निष्पन्न होता है। साधारणीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें पाठक/दर्शक अपने निजी राग-द्वेष से मुक्त होकर साधारणीकृत भाव का आस्वादन करता है — भट्टनायक और अभिनवगुप्त का विवेचन यहाँ केंद्रीय है। शब्दशक्ति तीन हैं — अभिधा (मुख्य अर्थ), लक्षणा (लक्षित अर्थ) और व्यंजना (व्यंग्य अर्थ)।
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रस निष्पत्ति, साधारणीकरण, शब्दशक्ति
Hindi (Code 20) · Unit 3 · ~11 min read · Original chapter
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