भारतीय काव्यशास्त्र की शुरुआत तीन प्रश्नों से होती है — काव्य क्या है (लक्षण), काव्य कैसे बनता है (हेतु) और काव्य क्यों रचा जाता है (प्रयोजन)। मम्मट ने 'तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि' कहा — दोषरहित, गुणयुक्त शब्द-अर्थ ही काव्य है। हेतु तीन हैं — प्रतिभा, व्युत्पत्ति (शास्त्र-ज्ञान) और अभ्यास। प्रयोजन में यश, अर्थ, व्यवहार-ज्ञान, शिवेतर-क्षति और कांतासम्मित उपदेश आते हैं। उदाहरण: मम्मट का प्रयोजन-सूत्र 'काव्यं यशसेऽर्थकृते व्यवहारविदे शिवेतरक्षतये' परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
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काव्य के लक्षण, हेतु और प्रयोजन
Hindi (Code 20) · Unit 3 · ~11 min read · Original chapter
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