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हिन्दी साहित्येतिहास दर्शन

Hindi (Code 20) · Unit 2 · ~11 min read · Original chapter

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हिन्दी साहित्य का इतिहास लिखने की तीन प्रसिद्ध पद्धतियाँ हैं — वर्णानुक्रमिक (ग्रियर्सन, शिवसिंह सेंगर), कालक्रमानुसार कवि-परिचय (मिश्रबंधु) और वैज्ञानिक-ऐतिहासिक पद्धति (आचार्य रामचंद्र शुक्ल)। शुक्ल जी ने कालविभाजन का आधार 'जनता की चित्तवृत्ति' को माना — साहित्य किसी काल की मानसिकता का प्रतिबिंब है। उदाहरण: वीरगाथा काल का नाम वीर-भावना की प्रधानता से पड़ा, न कि केवल तिथियों से।

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