आधुनिक काल में हिन्दी गद्य की पाँच बड़ी विधाएँ विकसित हुईं — उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध और आलोचना। उपन्यास में प्रेमचंद युग केंद्रीय है; कहानी में प्रेमचंद से नई कहानी तक की यात्रा; नाटक में भारतेन्दु से मोहन राकेश तक; निबंध में शुक्ल से नामवर सिंह तक; आलोचना में शुक्ल, द्विवेदी और नामवर की त्रयी। उदाहरण: 'गोदान' को हिन्दी का महाकाव्यात्मक उपन्यास कहा जाता है क्योंकि उसमें किसान-जीवन का समग्र चित्र है।
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हिन्दी साहित्य की गद्य विधाएँ
Hindi (Code 20) · Unit 2 · ~12 min read · Original chapter
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