हिन्दी, उर्दू, दक्खिनी और हिन्दुस्तानी — चारों एक ही खड़ीबोली-परंपरा की शाखाएँ हैं, अंतर लिपि और शब्दावली का है, व्याकरण का नहीं। हिन्दी देवनागरी में तत्सम-प्रधान शब्दावली के साथ; उर्दू फ़ारसी-अरबी शब्दावली और नस्तालीक़ लिपि के साथ; दक्खिनी दक्षिण में विकसित हिन्दी-उर्दू का रूप; हिन्दुस्तानी वह सहज बोलचाल रूप जिसे गांधी जी ने राष्ट्रभाषा के रूप में देखा। उदाहरण: 'किताब' और 'पुस्तक' एक ही वस्तु के दो शब्दिक रूप हैं — यही विविधता है।
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हिन्दी के विविध रूप
Hindi (Code 20) · Unit 1 · ~10 min read · Original chapter
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